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कन्या राशि में शुक्र (वीनस) — शास्त्रीय ज्योतिष का विश्लेषण कन्या राशि (वृश्चिक राशि चक्र का 6वाँ स्थान) में स्थित शुक्र (वीनस) एक विशेष ज्योतिषीय योग का निर्माण करता है। शुक्र मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुम्भ और मीन राशियों में भ्रमण करता है। प्रत्येक राशि में उसके प्रभाव, स्वभाव और फल भिन्न होते हैं। कन्या राशि में स्थित शुक्र का विश्लेषण करने से पूर्व हमें यह जानना आवश्यक है कि शुक्र का इस राशि में क्या स्थान है — क्या यह उच्च का है, नीच का, स्वगृह का अथवा उदयस्थ है? इसके पश्चात् हम उसके व्यक्तित्व, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों, विवाह, करियर तथा दशाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। कन्या राशि में शुक्र का विश्लेषण करते समय हमें ध्यान में रखना चाहिए कि कन्या राशि बुध की स्वगृह राशि मानी जाती है। शुक्र और बुध दोनों ही बुद्धि, वाणी, कला और सौन्दर्य के कारक ग्रह हैं। अतः दोनों ग्रहों के बीच का सम्बन्ध जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करता है। कन्या राशि में शुक्र का उच्च, नीच अथवा स्वगृह स्थान ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का उच्च, नीच और स्वगृह निर्धारण राशि-चक्र में उनकी स्थिति के आधार पर किया जाता है। उच्च स्थान : शुक्र का उच्च स्थान मीन राशि में माना गया है। यहाँ शुक्र अपनी पूर्ण क्षमता का प्रदर्शन करता है। स्वगृह : शुक्र की स्वगृह राशि वृषभ और तुला है। इन राशियों में शुक्र सर्वाधिक बलवान होता है। नीच स्थान : शुक्र का नीच स्थान कन्या राशि में माना जाता है। इसका अर्थ है कि इस राशि में शुक्र अपनी पूर्ण शक्ति खो देता है और जातक को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कन्या राशि में शुक्र की स्थिति को नीच स्थान माना गया है। इसका कारण यह है कि कन्या राशि में शुक्र की स्थिति उसके शत्रु ग्रह बुध के साथ होती है। बुध कन्या का स्वामी है और शुक्र का मित्र भी है। किन्तु शुक्र की कन्या में स्थिति उसके प्रभावों को सीमित कर देती है। वृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) के अनुसार, "VIRGO ASCENDANT : Mars, Jupiter and the Moon are malefics while Mercury and Venus are auspicious. The conjunction of Venus and Mercury will produce yoga. Venus is a killer as well.
कन्या राशि (वृश्चिक राशि चक्र का 6वाँ स्थान) में स्थित शुक्र (वीनस) एक विशेष ज्योतिषीय योग का निर्माण करता है। शुक्र मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुम्भ और मीन राशियों में भ्रमण करता है। प्रत्येक राशि में उसके प्रभाव, स्वभाव और फल भिन्न होते हैं। कन्या राशि में स्थित शुक्र का विश्लेषण करने से पूर्व हमें यह जानना आवश्यक है कि शुक्र का इस राशि में क्या स्थान है — क्या यह उच्च का है, नीच का, स्वगृह का अथवा उदयस्थ है? इसके पश्चात् हम उसके व्यक्तित्व, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों, विवाह, करियर तथा दशाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
कन्या राशि में शुक्र का विश्लेषण करते समय हमें ध्यान में रखना चाहिए कि कन्या राशि बुध की स्वगृह राशि मानी जाती है। शुक्र और बुध दोनों ही बुद्धि, वाणी, कला और सौन्दर्य के कारक ग्रह हैं। अतः दोनों ग्रहों के बीच का सम्बन्ध जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का उच्च, नीच और स्वगृह निर्धारण राशि-चक्र में उनकी स्थिति के आधार पर किया जाता है।
कन्या राशि में शुक्र की स्थिति को नीच स्थान माना गया है। इसका कारण यह है कि कन्या राशि में शुक्र की स्थिति उसके शत्रु ग्रह बुध के साथ होती है। बुध कन्या का स्वामी है और शुक्र का मित्र भी है। किन्तु शुक्र की कन्या में स्थिति उसके प्रभावों को सीमित कर देती है।
वृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) के अनुसार,
"VIRGO ASCENDANT : Mars, Jupiter and the Moon are malefics while Mercury and Venus are auspicious. The conjunction of Venus and Mercury will produce yoga. Venus is a killer as well. The Sun's role will depend on his association. These effects are for Virgo ascendant."
(BPHS 54.31-32)
यहाँ स्पष्ट किया गया है कि कन्या लग्न में शुक्र शुभ फलदायी होने के साथ-साथ 'किलर' (घातक) भी हो सकता है, अर्थात् यदि शुक्र अशुभ ग्रहों के साथ युक्त अथवा दृष्ट हो तो जातक के जीवन में कष्टों का कारण बन सकता है।
कन्या राशि में स्थित शुक्र जातक के व्यक्तित्व पर निम्न प्रभाव डालता है:
शुक्र के प्रभावों को प्रमुख जीवन क्षेत्रों में निम्न प्रकार से देखा जा सकता है:
वृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार,
"If Venus be in Netrapanl Avastha in the ascendant, the 7th or 10th, there will be loss of wealth on account of sight afflictions (i.e. heavy medical expenses due to severe eye diseases)."
(BPHS 54.99-110)
इस श्लोक से स्पष्ट है कि शुक्र की नेत्रावस्था जातक के स्वास्थ्य एवं धन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →करियर के क्षेत्र में शुक्र का प्रभाव जातक को निम्न प्रकार से प्रभावित करता है:
किन्तु यदि शुक्र अशुभ ग्रहों के साथ युक्त अथवा दृष्ट हो तो जातक को करियर में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उसे अपने कार्यक्षेत्र में कठिन श्रम और बुद्धि का प्रयोग करना होगा।
विवाह एवं प्रेम सम्बन्धों में शुक्र का प्रभाव अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। कन्या राशि में स्थित शुक्र जातक के विवाह सम्बन्धी जीवन पर निम्न प्रभाव डालता है:
वृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार,
"If Venus be in Sayanavastha, the native although strong will incur dental diseases, be very short-tempered, bereft of wealth, will seek union with courtezans and be licentious."
(BPHS 46.99-110)
इस श्लोक से स्पष्ट है कि शुक्र की सायनावस्था जातक के विवाह एवं सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
यदि जातक की कुंडली में मंगल ग्रह मेष अथवा वृश्चिक लग्न में स्थित हो और शुक्र अशुभ स्थिति में हो तो जातक को मांगलिक दोष का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली मिलान करते समय शुक्र के प्रभावों को ध्यान में रखना अत्यन्त आवश्यक है।
अष्टकूट मिलान में शुक्र को मानसिक सामंजस्य एवं सौन्दर्य का कारक माना जाता है। यदि शुक्र अशुभ स्थिति में हो तो विवाह में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
ग्रहों की दशाओं का जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कन्या राशि में स्थित शुक्र की दशाएँ निम्न प्रकार से जातक के जीवन को प्रभावित करती हैं:
शुक्र की महादशा 20 वर्ष की होती है। इस दौरान जातक को निम्न क्षेत्रों में सफलता अथवा चुनौतियाँ प्राप्त हो सकती हैं:
वृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार,
"Dasa of Virgo Amsa The effects in the various Antardasas of the rasis concerned will be as follows Saturn (Capricorn or Aquarius) Many kinds of troubles, travels to distant places, fevers, distress from hunger."
(BPHS 64.22-26)
इस श्लोक से स्पष्ट है कि कन्या राशि के अम्श में शनि की अन्तर्दशा जातक को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
यद्यपि कन्या राशि में शुक्र का प्रभाव सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता, किन्तु कुछ विशेष योगों एवं दशाओं में यह अशुभ फल प्रदान कर सकता है। ऐसे में जातक को निम्न उपायों का अनुसरण करना चाहिए:
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